शिवपूजन और बिल्वपत्र : शिव पूजा के लिए बेलपत्र चयन और बिल्वपत्र तोड़ते समय रखें इन बातों का ध्यान

शिवपूजन और बिल्वपत्र

“त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम् । त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।”

अर्थात्–तीन दल वाला, सत्त्व, रज एवं तम:स्वरूप, सूर्य-चन्द्र-अग्नि–त्रिनेत्ररूप और आयुधत्रय स्वरूप तथा तीनों जन्मों के पापों को नष्ट करने वाला बिल्वपत्र मैं भगवान शिव को समर्पित करता हूँ।

मनुष्य जन्म दुर्लभ है, जिसका मुख्य लक्ष्य है मोक्ष की प्राप्ति। इसका मुख्य साधन है ज्ञान जो भगवान शिव की उपासना से प्राप्त होता है। शिवजी की आराधना केवल जल व पत्र-पुष्प से ही हो जाती है। इनमें प्रमुख है बिल्वपत्र , बिल्वपत्र (बेलपत्र) से ही शिवपूजन की पूर्णता है।

समुद्र-मंथन से उत्पन्न हलाहल-विष की ज्वाला से दग्ध त्रिलोकी की रक्षा के लिए भूतभावन भगवान शिव ने स्वयं ही उस महागरल का हथेली पर रखकर आचमन कर लिया और नीलकण्ठ कहलाए। उस विष की अग्नि को शांत करने के लिए भगवान शिव पर ठंडी वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं; जैसे–जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र गुलाबजल, आदि। इससे भगवान शिव का मस्तक शीतल रहता है। शिवपुराण में कहा गया है कि यदि पूजन में अन्य कोई वस्तु उपलब्ध न हो तो बिल्वपत्र ही समर्पित कर देने चाहिए। शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने से ही पूजा सफल और सम्पूर्णता को प्राप्त होती है।

बातें बिल्व वृक्ष की—-

  1. बिल्व वृक्ष के आसपास सांप नहीं आते ।
  2. अगर किसी की शव यात्रा बिल्व वृक्ष की छाया से होकर गुजरे तो उसका मोक्ष हो जाता है ।
  3. वायुमंडल में व्याप्त अशुध्दियों को सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा बिल्व वृक्ष में होती है ।
  4. चार पांच छः या सात पत्तो वाले बिल्व पत्रक पाने वाला परम भाग्यशाली और शिव को अर्पण करने से अनंत गुना फल मिलता है ।
  5. बेल वृक्ष को काटने से वंश का नाश होता है। और बेल वृक्ष लगाने से वंश की वृद्धि होती है।
  6. सुबह शाम बेल वृक्ष के दर्शन मात्र से पापो का नाश होता है।
  7. बेल वृक्ष को सींचने से पितर तृप्त होते है।
  8. बेल वृक्ष और सफ़ेद आक् को जोड़े से लगाने पर अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  9. बेल पत्र और ताम्र धातु के एक विशेष प्रयोग से ऋषि मुनि स्वर्ण धातु का उत्पादन करते थे ।
  10. जीवन में सिर्फ एक बार और वो भी यदि भूल से भी शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ा दिया हो तो भी उसके सारे पाप मुक्त हो जाते है ।
  11. बेल वृक्ष का रोपण, पोषण और संवर्धन करने से महादेव से साक्षात्कार करने का अवश्य लाभ मिलता है। कृपया बिल्व पत्र का पेड़ जरूर लगाये । बिल्व पत्र के लिए पेड़ को क्षति न पहुचाएं

शिवपूजा में बिल्वपत्र चढ़ाते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए:–

  1. बेलपत्र छिद्ररहित होना चाहिए।
  2. तीन पत्ते वाले, कोमल, अखण्ड बिल्वपत्रों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
  3. बिल्वपत्र में चक्र व वज्र नहीं होने चाहिए। बिल्वपत्रों में जो सफेद लगा रहता है उसे चक्र कहते हैं और डण्ठल में जो गांठ होती है उसे वज्र कहते है।
  4. बेलपत्र धोकर मिट्टी आदि साफ कर शिवजी पर अर्पित करने चाहिए।
  5. जिन तिथियों में बेलपत्र तोड़ने की मनाही है, उस समय बासी व सूखे बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं।
  6. बिल्वपत्र सदैव अधोमुख (उल्टा) चढ़ाना चाहिए। इसका चिकना भाग नीचे की तरफ रहना चाहिए।

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये उपाय:

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से या कुंकुम से ‘राम’ लिखकर या ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर अर्पण करना चाहिए। शिवपूजन में संख्या का बहुत महत्व होता है। अत: विशेष अवसरों पर जैसे शिवरात्रि, श्रावण के सोमवार, प्रदोष आदि को ११, २१, ३१, १०८ या १००८ बिल्वपत्र शिवलिंग पर अर्पित किए जा सकते हैं। मनोकामनापूर्ति, संकटनाश व सुख-सम्पत्ति के लिए इस मन्त्र के साथ चढ़ाएं बेलपत्र……

“भालचन्द्र मद भरे चक्ष, शिव कैलास निवास, भूतनाथ जय उमापति पूरी मो अभिलाष।

शिव समान दाता नहीं, विपति विदारन हार, लज्जा मेरी राखियो सुख सम्पत्ति दातार।।”

बिल्वपत्र अर्पित करने का मन्त्र :

भगवान शिव को बिल्वपत्र कई प्रकार के मन्त्र बोलते हुए अर्पित किया जा सकता है–

  • “नमो बिल्मिने च कवचिने च नर्मो वर्मिणे च वरूथिने च । नम: श्रुताय च श्रुतसेनाय च नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च।।“ श्रीसाम्बशिवाय नम:। बिल्वपत्राणि समर्पयामि।
  • “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्।।“ या

ॐ नम: शिवाय इस मन्त्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर बिल्वपत्र समर्पित किए जा सकते हैं। मन्त्र बोलने में असमर्थ हैं तो केवल ‘शिव’ ‘शिव’ कहकर भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।

शिवपूजा के लिए बेलपत्र चयन और बिल्वपत्र तोड़ते समय रखें इन बातों का ध्यान:

“अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेव प्रिय: सदा । गृह्णामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्।।“

चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को, संक्रान्ति व सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ने चाहिए। किन्तु बेलपत्र शंकरजी को बहुत प्रिय हैं अत: इन तिथियों में पहले दिन का रखा हुआ बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। यदि नए बेलपत्र न मिलें तो चढ़ाए हुए बेलपत्र को ही धोकर बार-बार चढ़ाया जा सकता है।

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