रामचरितमानस के मंत्र हैं चमत्कारी – करते हैं हर इच्छा पूरी

रामचरितमानस करेगा आपकी हर इच्छा पूरी – कीजिएः मानस मंत्रो का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ I

रामचरितमानस हैं एक चमत्कारी लेख, क्योकि इसके प्रत्येक मंत्र में मानव की हर एक इच्छाहो को पूरी करने का आसान रास्ता I आप कह सकते हैं की यह मानवजाति के लिए संजीवनी बूटी के सामन हैं I इससे उच्चारण करना भी मुश्किल नहीं हैं क्योकि मंत्र आसान भाषा में लिखे गएः है। धनलाभ, रोजगार प्राप्ति, पढ़ाई में एककाग्रता, ऊपरी बाधा से मुक्ति, कोर्ट-कचहरी के मामलो से छुटकारा, शीघ्र विवाह हेतु, गृह कलेश से निवृति, चिर आयु और धनसम्पत्ति की प्राप्ति या अन्य कोई भी इच्छा हेतु, रामचरितमानस के पावन मंत्रो का प्रयोग किया जा सकता हैं I ऐसा कहा गया हैं की इस ग्रन्थ के मंत्रो को स्वयं भगवान शंकर की असीम कृपा प्राप्त हैं I

इस महान ग्रन्थ का पाठ आप सकाम और निष्काम दोनों प्रकार से कर सकते हैं, निष्काम भाव में साधक की भावना का अधिक महत्व होता हैं लेकिन सकाम में साधक की भावना और नियम दोनों जरुरी होते हैं I

मंत्र दीक्षा कैसे ले?

रामचरितमानस के जिस मानस मंत्र की साधना आपको करनी हैं उसे लाल चन्दन की सहायता से पान के पत्ते पर लिखकर भगवान शंकर को अर्पण करे और उनके नाम के साथ साथ श्रीराम, हनुमान जी, तुलसीदास जी और अपने गुरुदेव का स्मरण करे और उनसे आपके नियम को सफल बनाने की प्रार्थना करे I इसके बाद उस पत्ते को माथे पर लगाकर आप स्वयं भगवान का आशीर्वाद समझ कर ग्रहण करे I

साधना करने हेतु उपयुक्त स्थान

उपासना हेतु आप एकांत बहुत आवश्यक हैं, साधना हेतु कच्ची जगह मिल जाएः जहाँ मिट्टी का फर्श हो तो उत्तम हैं लेकिन आजकल थोड़ा मुश्किल ही हैं मिट्टी का फर्श मिलना I इसलिएः अगर आप घर में ही साधना कर रहे हैं जहाँ फर्श पक्का हैं तो आप उससे पहले गंगाजल और गौमूत्र मिले जल से अच्छे से साफ कर ले और कमरे में कोशिश करे की सामन जैसे केलिन्डर, तस्वीरें हद से जयादा न हो I अगर हैं तो आप उन्हें दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर दे I

पूजाकक्ष को कैसे तैयार करे?

याद रखे पूजा करते समय आपका का मुख पूर्व या उत्तर की तरफ होना चाहिएः I पूजा हेतु चौकी लगाएः, सबसे पहले उस पर लाल कपडा बिछाकर चावल से अष्टदल कमल बनाएः, तत्पश्चात रामदरबार की तस्वीर स्थापित करे I उसके बायीं और घी का दीपक, मिट्टी का कलश और नवग्रह बनाएः और दायी और षोडशमातृका स्थापित करे I फिर एक लकड़ी के स्टैंड पर सवच्छ लाल कपडा बिछा कर उसपर रामचरितमानस की स्थापना करे I

कैसे करे पूजा आरम्भ?

सबसे पहले आचमन और पवित्रीकरण करें, उसके बाद त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) एवं सभी देवी देवताओं का ध्यान करे और फिर भद्रा-सूक्तम अथवा स्वस्तिवाचन का पाठ करें I

मनवांछित फल प्रदान करने वाले मानस मंत्र:-

धन-प्राप्ति हेतु मंत्र: 

‘जिमि सरिता सागर महुं जाही।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएं।
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं।।’

भाग्योदय हेतु मंत्र :

मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के॥
हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से॥

कार्य-सिद्धि हेतु मंत्र:

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
कौन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

लड़की के शीघ्र-विवाह हेतु मंत्र:

जय -जय गिरिवर राज किशोरी । जय महेश मुख चन्द चकोरी।।
जय गजबदन षडाननमाता ।जगत जननी दामिनी दुति गाता।।

नहिं तव आदि मध्य अवसाना । अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।
भव भव विभव पराभव कारिनि। विश्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

पति देवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।
महिमा अमित न सकहिं कहि सहस् सारदा सेष।।

सेवत तोहि सुलभ फल चारी।बरदायनी पुरारी पिआरी।।
देबि पूजि पद कमल तुम्हारे ।सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबहीं के ।।
कीन्हेऊँ प्रगट न कारन तेहीं।अस कहि चरन गहे बैदेही ।।

बिनय प्रेम बस भई भवानी । खसी माल मूरति मुसकानी ।।
सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ ।।

सुनु सिय सत्य असीस हमारी । पूजिहिं मनकामना तुम्हारी ।।
नारद बचन सदा सुचि साचा । सो बरू मिलिहि जाहिं मनु राचा ।।

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरू सहज सुंदर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेह जानत रावरो ।।

एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली ।।

जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाय कहि ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ।।

परीक्षा में सफलता हेतु:

जेहि पर कृपा करहिं जनुजानी।
कवि उर अजिर नचावहिं बानी।।
मोरि सुधारहिं सो सब भांती।
जासु कृपा नहिं कृपा अघाती।।
गुरु ग्रह गए पढन रघुराई ।
अल्प कल विद्या सब आई ॥

संकट से मुक्ति हेतु उपयोगी मंत्र:

मंगल भवन अमंगल हारी I
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी I
हरहु नाथ मम संकट भारी I I

चिंता से मुक्ति हेतु मन्त्र:

जय रघुवंश बनज बन भानू।
गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥

नज़र हटाने के लिएः अचूक मंत्र:

स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी।
निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।

हनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिएः

सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।

मोक्ष-प्राप्ति हेतु मंत्र:

सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × 2 =