क्या आप जानते है शास्त्रों में वर्णित मंत्र के 10 संस्कार

मंत्रो के 10 संस्कार

मंत्र सर्वशक्तिमान देवता स्वरूप ही होता है जिसमे अपार शक्ति और ऊर्जा का समावेश होता है, जिसके निरंतर जाप से साधक के हृदय में भक्ति का उदय होता है जिसके प्रभाव से सर्वशक्तिमान देवता की कृपा प्राप्त होती है ! मंत्रो में इस प्रभाव को कम करने के लिए जिससे कोई भी अनावश्यक व्यक्ति इसका दुरुपयोग न कर सके इसमें कुछ त्रुटि कर दी गयी अतः इन्ही त्रुटियों और दोषो को दूर करने की विधि को संस्कार कहलाया जाता है !

मंत्रो को अधिक प्रभावशाली और असम्भव कार्यो को करने में समर्थ बनाने के लिए मंत्रो का संस्कार करना परम आवश्यक है, अतः इन संस्कारो के बिना मंत्रो को प्रभावहीन समझा जाता है ! इसके लिए सर्वप्रथम जातक को किसी व्यक्ति विशेष से जो तंत्र मंत्र तथा यंत्र आदि में पारंगत या पूर्ण ज्ञान रखता हो (यह अति आवश्यक की किसी अच्छे गुरु की सानिध्य प्राप्त करे) उनसे दीक्षा ग्रहण करे तत्पश्चात अपने इष्ट देव या देवी के मंत्रो की साधना पूर्ण विधि-विधान तथा श्रद्धा से करें, साथ ही उनसे मंत्रो के संस्कार या मंत्रो को पूर्ण प्रभावशाली बनाने की क्रिया को भली भांति अच्छी तरह समझकर उसकी देखरेख में ही ये संस्कार करे। अतः इन संस्कारो के करने के पश्चात मंत्र पूर्ण प्रभावशाली बन जाते है तथा जिसके जप या साधना से व्यक्ति अपने सम्पूर्ण मनोरथों को पाने में सफल हो जाता है !

हमारे ऋषि मुनियों तथा शास्त्रों में वर्णित मंत्र के 10 संस्कार क्रमश: इस प्रकार है – 1-जनन, 2- दीपन, 3- बोधन, 4- ताड़न, 5- अभिषेक, 6- विमलीकरण, 7- जीवन, 8- तर्पण, 9- गोपन, 10- अप्यायन आदि ।

  मातृका वर्ण 

  1. जनन संस्कार :  गोरचन, चन्दन, कुमकुम आदि से भोजपत्र पर एक त्रिकोण बनायें। उनके तीनों कोणों में छः-छः समान   रेखायें खीचें। इस प्रकार बनें हुए 49 कोष्ठकों में ईशान कोण से क्रमशः मातृका वर्ण लिखें। फिर देवता को आवाहन करें, मंत्र के एक-एक वर्ण का उद्धार करके अलग पत्र पर लिखें। इसे जनन संस्कार कहा जाता है।
  2. दीपन संस्कार : ’हंस सोऽहम्”  मंत्र से सम्पुटित करके 1 हजार बार या १० माला मंत्र का जाप करना चाहिए।  (ह्ंसः ऊँ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय् जिह्वां कीलय बुद्धि विनाशय ह्लीं ऊँ स्वाहा सोऽहम् ) इस तरह यह मन्त्र को उद्दीप्त करता है।
  3. बोधन संस्कार : ’हूं’ बीज मंत्र से सम्पुटित करके 5 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए।  (“हूँ रामाय नमः हूँ “)
  4. ताड़न संस्कार : ’फट’ से सम्पुटित करके 1 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए।  ( “फट रामाय नमः फट”)
  5. अभिषेक संस्कार : मंत्र को भोजपत्र पर लिख कर ’ ऐं हंसः ऊँ’ मंत्र से अभिमंत्रित करें, तत्पश्चात 1 हजार बार जप करते हुए जल से अश्वत्थ पत्रादि द्वारा मंत्र का अभिषेक संस्कार करें।
  6. विमलीकरण संस्कार :मंत्र को ’ऊँ त्रौं वषट’ इस मंत्र से सम्पुटित करके 1 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए। ( “ॐ त्रों वषट रामाय नमः वषट त्रों ॐ”)
  7. जीवन संस्कार : मंत्र को ’स्वधा-वषट’ से सम्पुटित करके 1 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए। ( “स्वधा वषट कृष्णाय नमः वषट स्वधा”)
  8. तर्पण संस्कार : मूल मंत्र से दूध ,जल और घी द्वारा सौ बार तर्पण करना चाहिए।
  9. गोपन संस्कार : मंत्र को ’ ह्रीं ’ बीज से सम्पुटित करके 1 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए। (“ह्रीं रामाय नमः ह्रीं”)
  10. आप्यायन संस्कार : मंत्र को ’ हसौ: ’ सम्पुटित करके 1 हजार बार मंत्र जाप करना चाहिए। (“हसौ: रामाय नमः हसौ:”)

 

इस प्रकार से संस्कारित मंत्र अति शीघ्र फलदायी होते है !

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