क्या ॐ के जाप से कोरोना वायरस पर रोकथाम की जा सकती है?

जी हां “ॐ” की ध्वनि कोरोनावायरस प्रिवेंशन के लिए एक बेहतरीन उपाय हैं I

भारत देश जहाँ अद्भुत और गूढ़ ज्ञानों से भरा हुआ है , जो हमेशा से ही अपने ज्ञान से संपूर्ण विश्व पर विजय हासिल करता आया है और आगे भी करता रहेगा ! हमारे यहाँ पर वेद ,पुराण तथा असंख्य किताबें है जिसमे हर एक वस्तु का ज्ञान बड़े व्यापक तौर पर प्राप्त होता है ! हमारे ऋषि मुनि जो आदि काल से ही प्राणायाम तथा ॐ का जाप करने को विशेष महत्व देते है क्योंकि वह भली भांति से इनके लाभों से अवगत थे ! उनका मानना था की प्रत्येक दिन अगर इसको निश्चित समय के लिए जाया तो हम बड़ी से बड़ी समस्या ( मानसिक और शारीरिक दोनों ) पर विजय हासिल की जा सकती है !

हम सब भी प्राणायाम और ॐ के जाप के गुणों को भलीभांति जानते और समझते है I  ॐ के जाप से हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा या तंरगे उत्पन्न होती है जिससे कोरोना वायरस से होने वाले दुष्प्रभावों में कमी लायी जा सकती है ! आज २०२० में जहाँ संपूर्ण विश्व कोरोनावायरस से ग्रस्त है वहां पर हम ॐ तथा प्राणायाम को अपना के इस भयंकर महामारी से बच सकते है ! डॉक्टर का भी मानना है कि जिस किसी व्यक्ति का पाचन तंत्र ( immune system ) सुदृढ़ है वह इसके प्रकोप से बच रहे है !

सर्वप्रथम हम यह जानेंगे की , क्या है कोरोनावायरस डेफिनेशन और इसके लक्षण ?( What is a corona virus and it’s symptoms ?)

क्या है कोरोना वायरस : कोविड -१९ का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ़ जैसी समस्या हो सकती है.यह एक ऐसा वायरस है जो जीव से जीव में स्पर्श द्वारा, सांसों द्वारा, सांसों से निकलने वाले स्लाइवा जिसे लार कहते हैं द्वारा फैलता है ! इस वायरस का मुख्य लक्षण तेज़ बुखार हैI बच्चों और वयस्कों में अगर 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुँचता है तभी यह चिंता का विषय है !

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण : इसके लक्षण फ़्लू से मिलते-जुलते हैं. संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ़, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता हैI इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है I कुछ मामलों में यह बीमारी घातक भी हो सकती हैं खास तौर पर अधिक उम्र के लोग और जिन्हें पहले से अस्थमा, डायबिटीज़ और हार्ट की बीमारी हैI

कोरोना की पहचान के लिए इन लक्षणों पर ग़ौर करें

  • तेज़ बुखार आना : अगर किसी व्यक्ति को सुखी खांसी के साथ तेज़ बुखार है तो उसे एक बार ज़रूर जांच करानी चाहिए. यदि आपका तापमान 99.0 और 99.5 डिग्री फारेनहाइट है तो उसे बुखार नहीं मानेंगे. अगर तापमान 100 डिग्री फ़ारेनहाइट (37.7 डिग्री सेल्सियस) या इससे ऊपर पहुँचता है तभी यह चिंता का विषय है.
  • कफ और सूखी खांसीः पाया गया है कि कोरोना वायरस कफ होता है मगर संक्रमित व्यक्ति को सुखी खांसी आती है. सांस लेने में समस्या कोरोना वायरस से संक्रमित होने के 5 दिनों के अंदर व्यक्ति को सांस लेने में समस्या हो सकती है. सांस लेने की समस्या दरअसल फेफड़ों में फैलते कफ के कारण होती है.
  • फ़्लू -कोल़्ड जैसे लक्षण : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर कभी-कभी बुखार, खांसी, सांस में दिक्कत के अलावा फ़्लू और कोल्ड जैसे लक्षण भी हो सकते हैं.
  • डायरिया और उल्टीः कोरोना से संक्रमित लोगों में डायरिया और उल्टी के भी लक्षण देखे गए है. करीब 30 प्रतिशत लोगों में इस तरह के लक्षण पाये गए हैं.
  • सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमीः बहुत से मामलों में पाया गया है कि कोरोना से संक्रमित लोगों को सूंघने और स्वाद की क्षमता में कमी आती है.
  • कोविद-19 आपके फेफड़ों को संक्रमित करता है : इसके दो मूल लक्षण होते हैं बुख़ार और सूखी खांसी I कई बार इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और उसके साथ बलगम भी आता हैं जो की एक बेहद चिंता का विषय हैं I

ओम (ॐ) को हमारे हिन्दू धर्म में महामंत्र माना गया है, ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण सृष्टि का वास इस जाप में है !ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। इसके बिना ना तो कोई मंत्र पूरा होता है और ना ही कोई पूजा। ओम (ॐ) शब्‍द अपने आप में ही बड़ा प्रभावशाली शब्‍द है। इस शब्‍द में पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है। इस शब्‍द के नियमित उच्‍चारण से आपको ब्रह्मांड की शक्तियां प्राप्‍त तो होंगी साथ ही आपके जीवन के सभी दुख और रोग भी दूर होगें। लेकिन आपको पता है कि ये मंत्र केवल ईश्वर ही नहीं आपके हेल्थ के लिए भी बहुत मायने रखता है। इस मंत्र के जाप से मेंटल और फिज़िकल हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं।  आज विज्ञान ने भी माना है कि इसे बोलने से इंसान को मानसिक तनाव से मुक्‍ती मिलती है और मन हमेशा शांत और स्वस्थ रहता है।

ॐ : ओउम् तीन अक्षरों से मिलकर बना है।  “अ” “उ” “म्” ।

“अ” का अर्थ है उत्पन्न होना,
“उ” का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
“म” का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् “ब्रह्मलीन” हो जाना।

उच्चारण की विधि : ओम (ॐ) का उच्चारण करने के लिए आप किसी भी पोजिशन में बैठ सकते हैं। अपनी आंखे बंद करके गहरी सांस लें और फिर ओम (ॐ) का उच्चारण करें। ओम का जाप तब तक जारी रखें जब तक आपकी सांस न चढ़ने लगे। सांस चढने लगे तो धीरे-धीरे सांस छोड़े और सामान्य स्थिति में आ जाएं। ये प्रक्रिया कई बार दोहराए। कोशिश करें कि इस दौरान पूरे शरीर में वाइब्रेशन महसूस हो। अगर ॐ का उच्चारण करते समय कान बंद कर लेंगे तो इससे और भी ज्यादा फायदा होगा। इसका उच्चारण ५, ७, १०, २१ बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ ज़ोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं।

कैसे है “ॐ” का उच्चारण स्वास्थ्यवर्द्धक और शारीरिक लाभ प्रदान करने वाला है 

  • यह शरीर के विषैले तत्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण उत्पन्न होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
  • यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
  • इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।
  • थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।
  • नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।
  • कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।
  • ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
  • ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।
  • ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • अगर आपको घबराहट होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

कैसे ॐ के जाप से कोरोना के दुष्प्रभावों पर लाभ प्राप्त किया जा सकता है

सर्वप्रथम “ॐ” का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है और साथ के साथ यह आपके पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनता हैं तथा खून के प्रवाह को शरीर मैं बेहतर करता है । “ॐ” का उच्चारण का विशेष प्रभाव हमारे श्वसन प्रणाली में भी देखने को मिलता है I क्योकि इसके जाप करने से फेफड़े सुचारु रूप से काम करते है और फेफड़ों में जमी अनावश्यक गन्दगी धीरे धीरे ख़तम होने लगती हैं जिसके कारन हमारे हृदय भी सुदृढ़ होता हैं । जब हमारा शरीर पूर्ण रूप से मजबूत और स्वस्थ होगा तो हम किसी भी महामारी जैसे की कोरोना वायरस इंडिया से लड़ने में सक्षम होंगे I इसीलिए हमारे ऋषि मुनियो ने कहा है कि ” पहला धन निरोगी काया ” I

आशा है आप अब सभी अपना कुछ कीमती समय निकाल कर ॐ का जाप अवश्य करेंगे और साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे आपको जिनकी फ़िक्र है खासतौर से आने वाली यंग जनरेशन को जो की हमारे देश का आने वाला भविष्य हैं I

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