क्या होते है मंत्र………………परिभाषा

मन्त्र की शक्ति और स्वरुप की व्याख्या

विश्व के सभी धर्मों में मन्त्रों को विशेष स्थान प्राप्त है। मन्त्र की शक्ति और स्वरुप की व्याख्या करने पर कहा जा सकता है कि मन्त्र अविनाशी है, सर्व व्यापक हैं, नित्य हैं, क्योंकि मन्त्र उच्चारण से हम अपने सद्गुरु, इष्ट, देवी-देवता एवं सर्व पारलौकिक शक्तियों से सम्पर्क साधकर विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। मंत्र शब्दों का एक ऐसा खास क्रम है जो उच्चारित होने पर एक खास किस्म का कंपन पैदा करते हैं, जो हमें हमारे द्वारा उन स्पंदनों को ग्रहण करने की विशिष्ट क्षमता के अनुरूप ही प्रभावित करते हैं।

ज्यादातर मन्त्रों की उत्पत्ति हमारे ऋषि मुनियो द्वारा ही की गयी हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने शब्दों से उत्पन्न होने वाली ध्वनि एवं कंपन को पहचाना और शब्दों को इस प्रकार एकत्रित किया कि उनका उच्चारण करके ब्रह्माण्ड की किसी भी शक्ति या देवी देवता से विशेष कार्य हेतु सम्पर्क बनाया जा सके। मन्त्र जाप से ऐसी शक्तिशाली कंपन उत्पन्न होती है जो हमारी प्रार्थना को परमात्मा तक पहुँचती है। अतः मंत्र का मूल भाव होता है- मनन ।

  • ‘मंत्र’ का अर्थ शास्त्रों में ‘मन:तारयति इति मंत्र:’ के रूप में बताया गया है, अर्थात मन को तारने वाली ध्वनि ही मंत्र है। वेदों में शब्दों के संयोजन से ऐसी ध्वनि उत्पन्न होती है, जिससे मानव मात्र का मानसिक कल्याण होता है ।
  • मंत्र शब्द (मन+त्र) के संयोग से बना है ! मन का अर्थ है सोचना, विचार ,मनन ,या चिंतन करना ! और “त्र ” का अर्थ है बचाने वाला, तारने वाला ,सभी प्रकार के अनर्थ, भयादि से मुक्ति !
  • मंत्र इस शब्द में ‘मन्’ का तात्पर्य मन और मनन से है और ‘त्र’ का तात्पर्य शक्ति और रक्षा से है । मंत्र अर्थात जिसके मनन से व्यक्ति को पूरे ब्रह्मांड से उसकी एकरूपता का ज्ञान प्राप्त होता है ।

अतः मंत्र शब्दों का संचय होता है जिसमे चमत्कारी शक्ति निहित होती है ! मंत्रो में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति का समावेश होता है और इनकी शक्ति भी महाप्रभु की अनंतता की तरह ही अनंत होती है। मंत्रों के उच्चारण से इसका सीधा प्रभाव स्वयं उसके उच्चारणकर्ता पर पड़ता है और दूसरा उस पर जिसे निमित्त बनाकर या जिसके नाम से संकल्प लिया जाता है। अगर मन्त्र जप विधि के अनुसार नियमों का पालन करके किया जाये तो विशेष लाभकारी सिद्ध होता है ।

सभी मंत्रों की साधना के ढंग अलग-अलग हैं और उनसे मिलने वाले फल भी भाँति-भाँति के होते हैं। मंत्रो के द्वारा पूर्ण लाभ उठाने हेतु यह परम आवश्यक है कि उसे पूरी तरह से जाना जाए और उच्चारण किया जाए । मंत्र चैतन्य व दिव्य ऊर्जा से युक्त होते हैं परंतु गुरु परंपरा से प्राप्त मंत्र ही प्रभावी होते हैं। उसके लिए जानने-समझने वाले समर्थ गुरु से दीक्षा सहित मंत्र की जानकारी हासिल करना आवश्यक है। सच्चे गुरु के बिना मंत्रों का सही उच्चारण, लय व जप-विधि के बारे में कुछ भी जानना मुश्किल है। गुरु द्वारा बताए मंत्रों का सही तरीके से नियमपूर्वक व श्रद्धा से जप किया जाए तो उनसे अवश्य लाभ मिलता है।

 

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