कुंडली में दो ग्रहों की युती के फल जानिये : सूर्य और अन्य ग्रह

दो ग्रहों की युती के फल

जब दो ग्रह एक ही राशि में हों तो इसे ग्रहों की युति कहा जाता है। जब दो ग्रह एक-दूसरे से सातवें स्थान पर हों अर्थात् 180 डिग्री पर हों, तो यह प्रतियुति कहलाती है। अशुभ ग्रह या अशुभ स्थानों के स्वामियों की युति-प्रतियुति अशुभ फलदायक होती है।

ज्योतिष में सूर्य को बहुत ही ज्यादा महत्व दिया गया है | ये हमारी आत्मा का कारक ग्रह है और जैसा की आपको पता है की जिसकी आत्मा बलवान हो वो दुनिया में एक सफल इंसान माना जा सकता है | सूर्य बिना किसी लोभ लालच के इस दुनिया में अपनी रौशनी बिखेरता रहता है इसलिये सूर्य प्रधान व्यक्ति भी बिना किसी लोभ लालच के संसार में अन्य व्यक्तियों की सहायता करता रहता है |
आकाश में रौशनी, पृथ्वी की गर्मी, राजा तपस्वी, सत्य पालन, परोपकार और प्रकृति का स्वामी सूर्य देव है | यह परम्परावादी ग्रह है, जिसका होना दिन और न होना रात है | ये मानव शरीर में आत्मा है | निरंतर चलते रहना अपना अंत न बताना और इधर उधर हुये बिना रहना ही इस सूर्य देव का कमाल है | सूर्य प्रभावी व्यक्ति अपने निर्भीक, साहसी तथा परोपकारी के साथ अपने वचन के बहुत पक्के होते है और ये बहुत विश्वासपात्री होते है !

  • सूर्य और चन्द्र = सूर्य का चन्द्रमा के साथ सम्बन्ध होने पर देखने के बाद सोचने के लिये शक्ति देता है इन जातकों में ज्योतिष शास्‍त्र सीखने की क्षमता होती है। ये ग़जब के मूर्तिकार होते हैं।  राजकीय ठाठ -बाठ , अधिकार, पद, उत्तम राजयोग , डॉक्टर , दो विवाह , गृहस्थ जीवन हल्का , स्त्रीयों द्वारा विरोध, बुढ़ापा उत्तम।
  • सूर्य और मंगल = सूर्य का मंगल के साथ मिलने पर शौर्य और पराक्रम की वृद्धि करता है ,ये जिस भी क्षेत्र में अपनी किस्मत आज़माते हैं उसमें सफल होते हैं, इनमें प्रसिद्ध होने की क्षमता होती है। यह एक सफल व्‍यापारी होते हैं। ये कलाकार और साहसी होते हैं। इन जातकों की कुंडली में लक्ष्‍मी योग होता है अर्थात् यह अत्‍यंत धनी होते हैं। ग्रहों की यह युति जातक को क्रोधी, साहसी और परिश्रमी बनाती है। यह युति जातक को साहसी ,अग्नि से संबंधित कामों में सफलता ,सर्जन ,डॉक्टर ,सरकारी अधिकारी , सर में चोट का निशान , दुर्घटना , खुद का मकान बनाते है।
  • सूर्य और बुध = सूर्य ,बुध के साथ मिलकर अपने शौर्य और गाथा को दूरस्थ प्रसारित करता है अपनी वाणी और चरित्र को तेजपूर्ण रूप मे प्रस्तुत करता है ! इन जातकों में मधुरभाषी एवं विश्लेषणात्मक गुण होते हैं। यह अच्‍छे, संपादक और विचारक होते हैं। यह युति जातक को उच्च विद्या तथा तीव्र बुद्धि देता है, सरकारी नौकरी में सफलता, अच्छे ज्योतिष ,अपने परिश्रम से मान सामान तथा धनवान बनते है ,बचपन में कष्ट को भोगता है ।
  • सूर्य और गुरू = सूर्य -गुरु के साथ मिलकर सभी धर्म और न्याय तथा लोगो के आपसी सम्बन्धो को बनाता है,लोगो के अन्दर धन और वैभव की कमी को पूरा करता है। ये जातक ज्ञान का भंडार होते हैं। इन्‍हें बड़ी आसानी से वरिष्‍ठ अधिकारियों और प्रसिद्ध लोगों से सहयोग प्राप्‍त होता है। मान-मर्यादा ,श्रेष्ठता , उच्च पद तथा यश में वृद्धि करता है, स्वयं की मेहनत से सफलता।
  • सूर्य और शुक्र = सूर्य – शुक्र के साथ मिलकर राजसी  ठाठ-बाट और शान शौकत को दिखाता है भव्य कलाकारी से युक्त राज महल और लोगो के लिये वैभव को इकट्ठा करता है । इन जातकों का मन हमेशा यौन विचारों से भरा रहता है। इन्‍हें अधिकतर नेत्र रोग परेशान करते हैं। कला, साहित्य, यांत्रिक कला का ज्ञान , क्रोध, प्रेम सम्बन्ध , बुरे, गृहस्थ बुरा , संतान में देरी , तपेदिक , पिता के लिए अशुभ।
  • सूर्य और शनि = सूर्य -शनि के साथ मिलकर गरीबो और कामगार लोगो के लिये राहत का काम देता है जिनके पास काम नही है जो भटकते हुये लोग है उन्हे आश्रय देता है पिता-पुत्र में बिगाड़ अथवा जुदाई। युवावस्था में संकट, राज दरबार बुरा। स्वास्थ कमजोर। पिता की मृत्यु , गरीबी। घरेलू अशांति। पत्नी का स्वास्थ कमजोर। ये जातक कम धार्मिक होते हैं। इन्‍हें धातुओं का अच्‍छा ज्ञान और जानकारी होती है। इस युति के जातको को अपने जिंदगी में बहुत मेहनत तथा उतार चढ़ाव के बाद अपना लक्ष्य हासिल होता है !
  • सूर्य और राहू = सूर्य राहु की युति को बहुत अच्छा नहीं बताया गया है इस तरह की युति व्यक्ति को गुस्सैल तथा चिड़चिड़ा स्वभाव वाला बनता है इस युति को ग्रहण योग भी कहते है जिस भी भाव में यह योग होता है उस भाव के कारको में कमी लाता है ! परिवार की बदनामी का डर,श्वसुर या ससुराल पक्ष की धन की स्थिति कमजोर, सरकारी नौकरी में परेशानी,चमड़ी पर दाग ,खर्च हो। घरेलू अशांति तथा वैवाहिक सुख में कमी। जातक नशीलें पदार्थ का सेवन करने वाला होता है !
  • सूर्य और केतू = जिस प्रकार सूर्य -राहु की युति अच्छी नहीं बतलायी गयी उसी प्रकार से सूर्य का केतु के साथ युति बनाना भी कुछ अच्छा नहीं माना गया है ! जातक को जीवन में बहुत आर्थिक संकटों से गुजरना पड़ता है ,सरकारी काम अथवा सरकारी नौकरी में उतार-चढ़ाव। संतान का सुख में कमी या संतान से बुरे संबंध ।

ध्यान देने योग्य विषय –
ग्रहों की युति के साथ ग्रहों के अन्य बलाबल जैसे की अस्त या नीच, स्वक्षेत्री ,मित्र या शत्रु राशि में होना, नक्षत्र आदि बातों पर भी विचार करना आवश्यक है |

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