कर्ण पिशाचिनी वैदिक पद्धति साधना

कर्णपिशाचिनी वैदिक पद्धति साधना

हमारे ऋषिओं ने भी उस अतीत,वर्तमान और भविष्य की घटनाओं का ज्ञान लेने के लिए कर्णपिशाचिनी को वैदिक पद्धति से सिद्ध किया।

वशिष्ठ ऋषि ने भी कर्णपिशाचिनी को वैदिक पद्धति से सिद्ध किया था जिसका प्रमाण कई ग्रंथों में है, आज जो कर्ण–पिशाचिनी की वैदिक पद्धति और मन्त्र देने वाला हूँ उसे वशिष्ठ के गुरु पिप्पलाद ऋषि ने स्वयं रचा था।

ऋषियों ने भी इसको सिद्ध किया किन्तु अपनी मर्यादा में रहकर, इस मन्त्र के माध्यम से साधक को कोई तकलीफ नहीं हो सकती।

आपसे निवेदन है किसी विद्वान गुरु आदि से सलाह लेकर ही साधना में बैठना चाहिए क्योंकि साधना की बारीकियां मात्र आपको पुस्तकें नहीं समझा सकती एक सजीवित गुरु ही समझा सकता है।

यह साधना 21 दिनों की होती है किंतु पूर्ण सिद्धि 41 दिन में प्राप्त होती है । इस साधना का समय सूर्योदय के समय 11 माला और सूर्यास्त के समय 11 माला है। सिद्धि होने पर देवी साधक को कानो में आवाज भी देती है और भूत भविष्य वर्तमान का सही सही पता बता देती है।

 

विनियोगः
अस्य कर्णपिशाचिनीमन्त्रस्य पिप्पलाद ऋषिः नीवृच्छन्दः कर्णपिशाचिनी देवता ममाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यासः
ॐ पिप्पलाद ऋषये नमः शिरसि १।

नीवृच्छन्दसे नमो मुखे २।

कर्णपिशाचिनीदेवतायै नमो हृदि ३।

विनियोगाय नमः सर्वांगे ४।

करन्यासः
ॐ अंगुष्ठाभ्यां नमः १।

ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः २।

कर्णपिशाचिनी मध्यमाभ्यां नमः ३।

कर्णे मे अनामिकाभ्यां नमः ४।

कथय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ५।

स्वाहा करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ६।

हृदयादिषडगन्यासः
ॐ हृदयाय नमः १।

ह्रीं शिरसे स्वाहा २।

कर्णपिशाचिनी शिखायै वषट् ३।

कर्णे मे कवचाय हुं ४।

कवच नेत्रत्रयाय वौषट् ५।

स्वाहास्त्राय फट् ६।

इस प्रकार न्यास करके कर्णपिशाचिनी का ध्यान करें –

ॐ चितासनस्थां नरमुण्डमालां, विभूषितामस्थिणीन्कराब्जैः ।

प्रेतां नरान्त्रैर्दधतीं कुवस्त्रां, भजामहे कर्णपिशाचिनीं ताम् ॥

 

मंत्रॐ ऐं ह्रीं ऐं क्लीं एं ग्लौं, ॐ नमः कर्णाग्नौ कर्ण पिशाचिका देवि अतीतानागत वर्तमान वार्ता कथय मम कर्णे कथय कथय तथ्यं मुद्रावार्ता कथय कथय आगच्छागच्छ सत्यंसत्यं वदवद वाग्देवि स्वाहा ।

#जप_संख्या… सवालाख मंत्र का जप (1250 माला)

#जरूरी :- हर रोज, जप शुरू करने से पहले.. दिग् बंधन, गुरुकवच का पाठ, गायत्री महामंत्र  तथा  नवार्ण मंत्र की एक माला अवश्य करें..

 

आवश्यक साधना सामग्री-

1 लाल वस्त्र या काले वस्त्र

2 आसन लाल या काला

3 पूर्ण चैत्यन्य या सिद्ध की हुई रुद्राक्ष माला

4 लाल चंदन या अष्टगंध का तिलक

5 कर्णपिशाचिनी का भोग जिस पर आकर्षित होकर देवी साधक को सिद्धि प्रदान करती है।।

6 ग्वार पाठे अर्थात घी कवार अर्थात घृत कुमारी का टुकड़ा भोग

7 तेल का अखण्ड दिया बन्द कमरे में जलता रहे

8 फल, फूल चमेली या मोगरा या लाल गुलाब

9 चमेली इत्र, अगरबत्तियां कमरे में छिड़कने के लिये।

10 इसमे दिशा उत्तर होती है।

11 जिस भी स्थान या साधना कक्ष में साधना करे वहां पर किसी अन्य व्यक्ति का प्रवेश पूर्ण रूप से निषेध

 

विशेष जानकारी : – आपसे निवेदन है किसी विद्वान या गुरु आदि से सलाह लेकर ही साधना में बैठना चाहिए क्योंकि साधना की बारीकियां मात्र आपको पुस्तकें नहीं समझा सकती एक सजीवित गुरु ही समझा सकता है।

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