गणपति गायत्री शाबर महामंत्र

गणपति गायत्री शाबर महामंत्र

“सत नमो आदेश। गुरूजी को आदेश। ओम् गुरुजी।

मूल चक्र में करे जो वास,परसो परम ज्योति प्रकाश ।।

गणपति स्वामी सन्मुख रहे,सुध्दि बुध्दि निर्मली गहे ।।

गमकी छोड़ अगमकी कहे,सतगुरू शब्दभेद पर रहे ।।

ग्यान गोष्ठी की काया थापी,सतगुरू दियो लखाय ।।

मूल महल में पिण्डक जडिया,गगन गरज्यो जाय ।।

ओम् गणेशाय विद्महे महागणपतये धीमहि तन्नो एकदन्त: प्रचोदयात् ।।”

 

प्रयोग—–
गणेश चतुर्थी प्रारंभ करके रोज इस मंत्र का 21 पाठ करें यह मंत्र खास मन बुद्धि के व्यक्तियों के लिए हैं जो बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता परीक्षा आते हैं घबराहट सी बच्चों के मन में होती है ऐसे लोगों के लिए गणेश गायत्री का प्रयोग बहुत रामबाण है ! कांसे की कटोरी में जल भरकर इस मंत्र का पाठ नियमित 21 बार करें 21 दूर्वा इस मंत्र से अभिमंत्रित कर गणेश जी को चढ़ाएं इस मंत्र का पाठ बुधवार से करना है या गणेश चतुर्थी से अपामार्ग की जड़ या टाइनी को बुधवार के दिन यही मंत्र पढ़ते हुए उखाड़ दे गंगाजल से या कोई भी सादे पानी से धो धाकड़ अपने पूजा स्थान में रख कर किस मंत्र का पाठ करें और पाठ करता स्वयं भी कर सकता है दूसरे के लिए भी कर सकता है मां बाप अपने बच्चों के लिए भी कर सकते हैं फिर उस टहनी को या जड़ उस व्यक्ति को दतुवन कराएं ऐसा नियम 3 महीने तक करें यदि अपामार्ग ना मिले तो पंसारी की दुकान से अक्कलगरा नाम की एक वनस्पति मिलती है उस वनस्पति को बुधवार के दिन लाकर गणेश गायत्री से अभिमंत्रित कर उसका चूर्ण बनाने और अमरूद में डालकर बच्चों को खिलाएं हमारा आजमाया हुआ प्रयोग है आशा करते हैं आप भी करोगे !

!!श्री नाथजी गुरुजी को आदेश आदेश !!

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