देह रक्षा हेतु उपाय : सिख धर्म का चमत्कारिक सबद

देह रक्षा हेतु उपाय : सिख धर्म का चमत्कारिक सबद

हिंदू धर्म में विभिन्न जातियों के लोग रहते हैं जो अलग-अलग मंत्रों का अनुसरण करते हैं और जिनकी पूजा- अनुष्ठान की अपनी-अपनी विधियां होती हैं ! लक्ष्य सब का एक होता है – मानव कल्याण और प्राण रक्षा। भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां रोज हजारों प्रकार की हवन एवं मंत्र क्रियाएं तथा कई प्रकार के टोटके किए जाते हैं। इन सभी का लक्ष्य एक है – जीवन को परेशानियों और बीमारियों से मुक्त रखना, उसे सही दिशा देना।

सबद या मंत्र 

“सेवी सतिगुरु आपणा हरि सिमरी दिन सभी रैणि।

आपु तिआगि सरणि पवां मुखि बोली मिठड़े वैण।

जनम जनम का विछुड़िआ हरि मेलहु सजणु सैण।

जो जीअ हरि ते विछुड़े से सुखि न वसनि भैण।

हरि पिर बिनु चैन न पाईअै खोजि डिठे सभि गैण।

आप कामणै विछुडी दोसु न काहू देण।

करि किरपा प्रभ राखि लेहु होरू नाही करण करेण।

हरि तुध विणु खाकू रूलणा कहीअै किथै वैण।

नानक की बेनंतीआ हरि सुरजणु देखा नैण।” 

 

सिख धर्म का चमत्कारिक सबद : किसी भी प्रकार के रोग को दूर करने और देह रक्षा के लिए निम्नलिखित सबद या मंत्र का 41 दिन तक नित्य 108 बार जप करना चाहिए ।

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