कोरोना वायरस एस्ट्रोलॉजी प्रेडिक्टशन

कोरोना वायरस के लक्षणों, आयुर्वेदिक उपचार के बारे मैं हम पहले ही जानते हैं लेकिन आज हम एस्ट्रोलॉजी कोरोना वायरस के बारे में बात करेंगे I

ज्योतिषीय आकलन 

  • दिनांक २९ अक्टूबर २०१९ – शनि – गुरु – केतु का एक साथ धनु राशि में गोचर करना इस समय इस महामारी का जन्म समय भी माना गया है !
  • दिनांक २९ दिसंबर २०१९ –  शनि – गुरु – केतु तथा इनके साथ सूर्य – बुध का एक साथ धनु राशि में गोचर करना इस महामारी की व्यापकता का कारण बना अतः इसके बाद ही इस महामारी ने सम्पूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले लिया जिसके कारण अनगिनत मौतें पूरे विश्व भर में हुई !
  • दिनांक १४ मई २०२० से जून २०२० तक इस महामारी में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा
  • दिनांक २० जुलाई २०२० से ५ अगस्त २०२० – गुरु मकर से अपनी राशि धनु में प्रविष्ट होंगे जहाँ केतु के साथ मिलकर तथा राहु दृष्ट होने के कारण पुनः महामारी को नये-नये रूपों में जन्म देगी !
  • दिनांक ५ अगस्त २०२० से ५ सितम्बर शनि का मकर से पुनः धनु राशि में आना तथा गुरु – केतु के साथ युति ओर राहु से दृष्ट होना फिर से महामारी का प्रकोप पूरे विश्व भर में रहेगा ! विश्व भर में त्राहि-त्राहि मच जाएगी , लाखों लोग मृत्यु को प्राप्त होंगे !
  • दिनांक ३ सितम्बर २०२० से २९ सितम्बर २०२० – केतु का धनु से वृश्चिक तथा राहु का मिथुन से वृषभ में जाना इस महामारी से मुक्ति मिलेगी ! इस समय हमारे डॉक्टरों द्वारा की गई मेहनत सफल होगी अर्थात मेडिसीन ओर वैक्सीन की खोज पूर्ण तौर पर हो जाएगी जिसके कारण महामारी के आतंक से छुटकारा मिल जायेगा !

ज्योतिष में राहु और केतु दोनों को संक्रमण (बैक्टीरिया,वायरस) इंफेक्शन से होने वाली सभी बीमारियों और छिपी हुई बीमारियों का ग्रह माना गया है। बृहस्पति, जीव और जीवन का कारक ग्रह है तो शनि को काल अर्थात समय की परिभाषा से सम्बोदित किया गया है I किसी भी घटना को निर्धारण के लिए गुरु और शनि का विशेष योगदान रहता है  और कोरोना वायरस एस्ट्रोलॉजी इंडिया के अनुसार 4-५ ग्रहों का एक साथ होना जिसमे विशेष रूप से गुरु, शनि,केतु और राहु की दृष्टि का होना बताया जा रहा है I

जहाँ तक राहु के द्वारा होने वाली बीमारियों का समाधान आसानी से मिल जाता है परन्तु दूसरी तरफ केतु के द्वारा होने वाले इस तरह के रहस्मयी संक्रामक रोग जब सामने आते हैं तो उनका समाधान आसानी से नहीं मिल पाता और ऐसा ही हो रहा है इस समय एस्ट्रोलॉजी कोरोना वायरस के केस में। जब भी बृहस्पति और राहु, बृहस्पति और केतु का योग होता है तब ऐसे समय में संक्रमण रोग और रहस्य्मयी बीमारियाँ फैलती हैं जिन्हें चिह्नित करना अथवा समाधान कर पाना बहुत मुश्किल होता है I

ग्रहणों का आकलन 

ग्रहण एक खगोलीय अवस्था है जिसमें कोई खगोलिय पिंड जैसे ग्रह या उपग्रह किसी प्रकाश के स्रोत जैसे सूर्य और दूसरे खगोलिय पिंड जैसे पृथ्वी के बीच आ जाता है जिससे प्रकाश का कुछ समय के लिये अवरोध हो जाता है। इनमें मुख्य रूप से पृथ्वी के साथ होने वाले ग्रहणों में सूर्य ग्रहण तथा चंद्र ग्रहण उल्लेखनीय हैं ! पूर्ण ग्रहण तब होता है जब खगोलिय पिंड जैसे पृथ्वी पर प्रकाश पूरी तरह अवरुद्ध हो जाये तथा आंशिक ग्रहण की स्थिति में प्रकाश का स्रोत पूरी तरह अवरुद्ध नहीं होता

चंद्र ग्रहण – इस ग्रहण में चाँद या [चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी आ जाती है। ऐसी स्थिति में चाँद पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है। ऐसा सिर्फ पूर्णिमा के दिन संभव होता है।

सूर्य ग्रहण – इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी एक ही सीध में होते हैं और चाँद पृथ्वी और सूर्य के बीच होने की वजह से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है। ऐसा अक्सर अमावस्या के दिन होता है।

ग्रहण बेशक कुछ लोगों के लिए सिर्फ एक खगोलीय घटना है लेकिन ज्योतिष विज्ञान में इसके मायने काफी कुछ कहते हैं।  अगर हम इसके ज्योतिषीय तथ्यों पर प्रकाश डालें तो , मार्च 2019 से ही केतु धनु राशि में चल रहा है लेकिन चार नवम्बर 2019 को बृहस्पति का प्रवेश भी धनु राशि में हो गया था जिससे बृहस्पति और केतु का योग बन गया था जो के रहस्मयी संक्रामक रोगों को उत्पन्न करता है तथा राहु की दृष्टि के कारण इसको ओर व्यापकता प्राप्त हुई क्योंकि राहु अस्थिरता का कारक माना जाता है I कोविद १९ की विशेषता यह है की छूने, स्पर्श तथा संपर्क में आने से ज्यादा फैल रही है जिसका मुख्य कारण राहु ग्रह को बताया जा रहा है !

4 नवम्बर को बृहस्पति और केतु का योग शुरू होने के बाद कोरोना वायरस का पहला केस चीन में नवम्बर के महीने में ही सामने आया था। यानि के नवम्बर में बृहस्पति-केतु का योग बनने के बाद ही कोरोना वायरस एक्टिव हुआ। इसके बाद एक और नकारात्मक ग्रह स्थिति बनी जो था 26 दिसंबर को होने वाला सूर्य-ग्रहण जिसने कोरोना वायरस को एक महामारी के रूप में बदल दिया। 26 दिसंबर को हुआ सूर्य ग्रहण सामान्य नहीं था क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के दिन छः ग्रहों के (सूर्य, चन्द्र, शनि, बुध, बृहस्पति, केतु) एक साथ होने से ष्ठग्रही योग बन रहा था जिससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव बहुत तीव्र हो गया था ।

आने वाला इन १ सालों में लगभग ४-५ ग्रहण होंगे जो कई विश्व में होने वाली घटनाओं को प्रभावित करेंगे I 21 जून को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण खंड ग्रास रूप में होगा जिसे रोग निवारण की नजर से देखा जा रहा है। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण से कुछ दिन पहले यानी 5 जून को चंद्र ग्रहण भी पड़ने वाला है। जबकि इस साल जून के अलावा एक और सूर्य ग्रहण पड़ेगा जो कि साल के अंत में होगा। 21 जून को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के दौरान सावधान भी रहने की जरूरत होगी। आने वाले दिनों में जो ग्रहों की युति बन रही है उससे भारत का मान पूरी दुनिया में बढ़ सकता है। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत सहित सभी देश इस कोरोना महामारी से पूरी तरह मुक्त नवंबर तक ही हो पाएंगे !

 

 

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