कालसर्प योगों के प्रकार – कुलिक कालसर्प योग

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गतांक से आगे……………..
गत लेख में हमने अनंत कालसर्प योग से सम्बंधित संपूर्ण जानकारी जैसेकि इसके निर्माण एवं इसके लक्षण तथा इसके विभिन्न लग्नो का फल इत्यादि के बारे में विस्तार चर्चा करी थी !

इस लेख में हम कालसर्प योगो में से द्वितीय अर्थात कुलिक कालसर्प योग के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे..…….

१ कुलिक कालसर्प योग का निर्माण :ज्योतिष के अनुसार जब राहू किसी कुंडली में दूसरे घर अर्थात धन भाव में स्थित हों तथा केतु कुंडली के आठवें घर में स्थित हों तथा शेष सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में स्थित हों अर्थात शेष सारे ग्रह दूसरे घर से आठवें घर के बीच में स्थित हों तो ऐसी कुंडली में कुलिक कालसर्प योग बनता है !

२ कुलिक काल सर्प योग के लक्षण : 

  • इस योग से प्रभावित जातक हमेशा पारिवारिक समस्या एवं उलझनों में व्यस्त रहता है !
  • इस योग से प्रभावित जातको के लिए धन एकत्रित कर पाना कुछ कठिन होता है !
  • इस योग से प्रभावित जातको का अपनी वाणी पर बिल्कुल नियंत्रण नहीं होता है !
  • इस योग से प्रभावित जातक को अपने जीवनकाल में कई बार दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है !
  • इस योग से प्रभावित जातक को विवाह तथा वैवाहिक जीवन से संबंधित समस्याएं का सामना करना पड़ता है !

३ कुलिक कालसर्प योग के सकरात्मक एवं नकारत्मक प्रभाव: 

३.१ नकारत्मक प्रभाव: यह योग द्वितीय भाव स्थित राहु से निर्मित होता है,अगर यह नकारात्मक रूप में जातक की कुंडली में स्थित है तो जातक को कुटुंब से दूर रहकर जीवन-यापन करना पड़ता है और पड़ोसिओं से भी मन-मुटाव जैसा व्यवहार होता है ! धन का संग्रह न होने के कारण आर्थिक संघर्ष जीवन पर्यन्त करना पड़ता है ! कई बार ऐसे जातको को पैतृक सम्पति से भी वंचित रहना पड़ सकता है ! यह योग विशेष रूप से वाणी को प्रभावित करता है अगर जातक का अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं है तो उसको अपयश एवं कई सारी मुसीबतो का सामना करना पड़ सकता है ! ऐसे जातक गलत फ़हमियों का शिकार एवं दुसरो के सिखाए में बहुत जल्दी आते है अगर दूसरे शब्दों में कहे तो यह जातक दुसरो से जल्दी प्रभावित हो जाते है जो इनके लिए कारण-अकारण  ही कष्टकारी होते है !

३.२ सकरात्मक प्रभाव: अगर यह सकारात्मक रूप में जातक की कुंडली में विद्यवान है तो ऐसे जातको का कुटुंब संयुक्त,धनवान और ख्यातिवान वाला होता है ! जीवन में कई बार अचानक धन जैसे कि गढ़ा धन, लाटरी एवं सट्टा के रूप में प्राप्त होने के योग होते है ! वाणी में मधुरता का होना स्वाभाविक होता है !  शिक्षा के क्षेत्र में उत्तम प्रर्दशन एवं उत्तम साधनो का उपभोग करने वाला होता है !

४ विभिन्न लग्नो के अंतर्गत बनने वाले कुलिक काल सर्प योगो का फल : 

४.१ मेष लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : मेष लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक के आर्थिक स्थिति पर विशेष रूप से प्रभाव डालता है ! जातक को जीवन पर्यन्त आर्थिक अनिश्चिता का विशेष रूप से सामना करना पड़ता है ! प्रायः इन जातको के लिए धन संग्रह करना कुछ जटिल होता है ! इन जातको को विशेष रूप से संधि व्यापार एवं भवन-भूमि सम्बन्धी लेन-देन में काफी सतर्कता दिखानी चाहिए ! शिक्षा में भी रुकावटें आती है जैसेकि शिक्षा में मन का न लगना एवं शिक्षा के उत्तम स्त्रोतों से वंचित होना ! जातक को नेत्र सम्बंधित एवं गुप्त रोग होने कि प्रबल संभावना होती है !

४.2 वृषभ लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : वृषभ लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक को कटुभाषी, कलहप्रिय एवं व्यर्थ की यात्रा करने वाला होता है ! प्रायः ऐसे जातको का संगत कुछ अच्छा नहीं होता है ! व्यर्थ बोलना, व्यर्थ भ्रमण एवं व्यर्थ की बातो के लिए कलह करना इनकी विशेषता होती है ! इन जातको का अपने जीवन में कोई उद्देशय नहीं होता है जिसके के कारण धन का नाश एवं घर में सैदव क्लेशपूर्ण वातावरण बना रहता है ! प्रायः ऐसे जातको का कुटुंब से दूर होकर ही धन-अर्जन करना लाभ कारक सिद्ध होता है ! जातक को सैदव बीमारी घेरे रहती है जिनका पूर्ण रूप से निदान नहीं हो पता है !

४.3 मिथुन लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल :  मिथुन लग्न का कुलिक कालसर्प योग मध्यम श्रेणी का होता है ! जातको को विशेष रूप से वाणी पर नियंत्रण और मित्रो से सावधान रहना चाहिए क्यूंकि मित्रो से धोखा प्राप्त होने का योग विशेष रूप से कुंडली में विद्यावान होता है ! प्रायः मित्रो के साथ संधि-व्यापार एवं भवन-भूमि सम्बन्धी लेन-देन में काफी सतर्कता दिखानी चाहिए ! ऐसे जातको का मिज़ाज़ काफी गरम एवं भावुक होते है ! यदा-कदा ही इन जातको को मानसिक समस्या होती है किन्तु गरम मिज़ाज़ एवं वाणी पर नियंत्रण न होना इनके जीवन में कारण -अकारण कष्टकारक सिद्ध होता है !

४.४ कर्क लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : कर्क लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक के जीवन में बहुत ही ज्यादा कष्टकारक सिद्ध होता है ! ऐसे जातक को हमेशा आर्थिक सम्बंधित समस्या रहती है चाहे वह व्यक्ति धनवान कुटुंब से ही सम्बन्ध क्यों न रखता हो,इन जातको को किसी भी क्षेत्र में परिश्रम के अनुकूल फल प्राप्त नहीं होते,इन जातको का परिवार संयुक्त होते हुए भी संयुक्त नहीं होता,इन जातको को विशेष रूप से श्वांस,कफ, वात,एवं गुप्त रोग होने की प्रबल योग होते है जिनका पूर्ण रूप से निदान संभव नहीं होता है ! कई बार ऐसे जातको को पैतृक सम्पति से भी वंचित रहना पड़ता है ! हमेशा अपयश एवं आलोचनाओं से घिरे रहते है ! प्रायः मन में सैदव डर लगना और असुरक्षित सा महसूस होता है !

४.५ सिंह लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : सिंह लग्न का कुलिक कालसर्प योग विशेष रूप से जातको के स्वभाव एवं वाणी में उग्रता लाता है! प्रायः व्यवहार में रुग्णता और चिड़चिड़ापन  जातक को पारिवारिक, वैवाहिक , सामाजिक,आर्थिक एवं शारीरिक समस्या और साथ ही हमेशा अपयश एवं आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है ! विशेष रूप से सरकारी मामलों में लापरवाही इनके लिए नुकसानदेय हो सकती है ! इन जातको को रक्त में उष्णता अधिक होने से रक्त ,त्वचा और पित्त सम्बंधित आदि जैसी बीमारी होती है ! इन जातको को बुरे व्यसनों से परहेज करना चाहिए !

४.६ कन्या लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : कन्या लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक को संतान पक्ष सम्बंधित कष्ट लाता है ! जातक को संतान की प्राप्ति प्रायः देर से ही होती है विशेष करके कन्या संतान अधिक होती है ! प्रायः जातक मानसिक रूप से सैदव तनावग्रस्त और उग्र स्वभाव वाला होता है ! कर्म एवं प्रयासों के विपरीत और निराशाजनक  सफलता मिलती है ! ऐसे जातको के गुप्त शत्रु अधिक होते है जो जातको को कारण – अकारण ही कष्टप्रद सिद्ध होते है,तो प्रायः जातको को अपने गुप्त ज्ञान एवं बातो का सावधानीपूर्वक किसी योग्य एवं विश्वनीय व्यक्ति से ही प्रकट करे अन्यथा मुसीबतो का सामना करना पड़ सकता है !

४.७ तुला लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : तुला लग्न का कुलिक कालसर्प  जातको को अत्यधिक परिश्रम करने के लिए उद्दत करता है ( प्रायः जातक शारीरिक श्रम अत्यधिक करता है ) किन्तु परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होता है चाहे वह उत्तम कुल से ही सम्बन्ध क्यों न रखता हो ! इन जातको को कोर्ट- कचहरी एवं बीमारी आदि में आवश्यकता से अधिक व्यय करना पड़ता है ! कई बार कारण – अकारण जेल भी जाना पड़ सकता है ! प्रायः इन जातको को बुरे व्यसन से  दूरी बनाई रखनी चाहिए ! इन जातको को विशेष रूप से श्वांस,कफ, वात,उदर सम्बंधित एवं गुप्त रोग होने की प्रबल योग होते है ! 

४.८ वृश्चिक लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : वृश्चिक लग्न का कुलिक कालसर्प जातक को विशेष रूप से भवन एवं भूमि सम्बंधित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ! विशेष करके इन जातको को भूमि व भवन सम्बंधित व्यापार नहीं करना चाहिए क्यूंकि जातक इस व्यापार को करने पर कंगाल हो जाता है ! जातक को अपने प्रतिकूल जीवन साथी प्राप्त होने के फलस्वरूप वैवाहिक जीवन प्रायः कुछ अच्छा नहीं होता है ! मित्र एवं रिश्तेदार प्रायः कष्टकारक ही सिद्ध होते है ! धर्म एवं कर्म में अरुचि होती है !

४.९ धनु लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : धनु लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक के शिक्षा एवं संतान पक्ष के लिए विशेष रूप से हानिकारक सिद्ध होता है,प्रायः इनमे से किसी एक की विशेष हानि होती है ! जातक के वैवाहिक जीवन में प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलते है ! कई बार जातक को ससुराल पक्ष से भी कष्ट प्राप्त होता है !जातक के जीवन में कारण-अकारण समसयाओ का आवागमन रहता जिससे प्रायः आर्थिक स्थिति पर विशेष प्रभाव पड़ता है ! धार्मिक कार्यो में रुझान नहीं होता है !

४.१०मकर लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : मकर लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक के लिए अत्यधिक कष्टकारक सिद्ध होता है ! यह योग जातक को आये दिन कोई न कोई मुसीबतो से सामना करवाता रहता है ! जातक का वाणी पर नियंत्रण न होना, अत्यधिक झूठ बोलना, अभद्र भाषा का प्रयोग करना उसके एवं उसके परिवार के लिए कष्टकारक सिद्ध होता है जिसके चलते अपयश एवं आलोचना जैसी भारी मुसीबतो का सामना करना पड़ता है ! इन जातको पर पितरो एवं कुलदेवता का श्राप भी रहता है जिससे इनके वैवाहिक जीवन में एवं परिवार में वैमनस्य एवं कटुता का वातावरण होता है ! जातक के जीवन में कई बार दुर्घटना से चोटग्रसित होने के प्रबल योग होते है !

४.११ कुम्भ लग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : कुम्भ लग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक को शारीरिक तौर पर कष्टकारक सिद्ध होता है ! जातक सैदव किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त होता है ! रोगग्रस्त होने के कारण आर्थिक स्थिति प्रायः अनस्थिर होती है ! मुख एवं गुदा से सम्बंधित रोग होने के प्रबल योग होते है ! निररंतर असफलता के कारण जातक का स्वभाव चिड़चिड़ा एवं रुग्ण हो जाता है जिसके चलते स्वयं अपने कार्यो के लिए विघ्न उत्पन्न करता है!

४.१२ मीनलग्न का कुलिक कालसर्प योग फल : मीनलग्न का कुलिक कालसर्प योग जातक को मानसिक तनाव देने वाला होता है ! प्रायः ऐसे जातक अत्यधिक सोचने वाला,गलतफमियों का शिकार,अशांत रहने वाला होता है जिसके चलते जातक कारण-अकारण ही कष्टों से ग्रसित होता है ! जातक को स्वजन, मित्रो एवं संतान से उपेक्षा ही प्राप्त होती है ! धार्मिक कर्मो में अरुचि का होना एवं माता के लिए जातक कष्टकारक सिद्ध होता है ! प्रायः इन जातको को अकेला रहने से परहेज करना चाहिए !

 

 

 

हमारा निरंतर प्रयास यही रहता है कि हम लेख से सम्बंधित सटीक एवं विश्वसनीय जानकारी आप सभी तक पहुंचाते रहे,” यही हमारा उद्देश्य और यही हमारी कामना है !”

TO BE CONTINUED…………..

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