कालसर्प योगों के प्रकार – अनंत कालसर्प योग

गतांक से आगे……………..
गत लेख में हमने कालसर्प योगो के १२ प्रकार एवं उनके नाम एवं उसमे राहु-केतु की स्थिति और संभावित कालसर्प योग होने के बारे में चर्चा करी थी !

इस लेख में हम कालसर्प योगो में से प्रथम अर्थात अनंत कालसर्प योग के बारे में प्रकाश डालेंगे…….

१ अनंत कालसर्प योग का निर्माण : राहु लग्न भाव में तथा केतु सप्तम भाव में स्थित हो और अन्य सभी सातो ग्रह (अर्थात सूर्य,चंद्र,मंगल,बुध,गुरु,शुक्र और शनि) इनके मध्य स्थित होने से अनंत कालसर्प योग का निर्माण होता है !

२ अनंत काल सर्प योग के लक्षण : 

  • जीवन में संघर्ष अधिक रहता है और पूरा कर्म फल नहीं मिलता
  • विवाहित जीवन में सुखों में कमी रहती है.
  • कम पुत्र सुख की प्राप्ति होना 
  • किसी और की जरुरत पड़ने पर इस योग वाला व्यक्ति उनकी सहायता कर सकता है किन्तु स्वयं पर समस्या या कष्ट आने पर कोई भी सहायता नहीं करता.
  • बिज़नेस में बड़ा घाटा आदि लगने की सम्भावना सदैव बनी रहती है.
  • अच्छी पढाई करने के बाद भी उसका पूरा प्रयोग नहीं कर पता है.
  • अपने मूल स्थान से दूर रह कर ही कमाई कर पता है और घर के सुख से वंचित रहना पड़ता है.
  • कालसर्प योग वाली कुंडली वाले व्यक्ति की पत्नी के गर्भपात अधिक संभावना होती है.
  • पूर्वजो की संपति नहीं मिलती है और भाई से किसी भी रूप में लाभ नहीं होता.
  • धन की हानि होती है.

३ अनंत कालसर्प योग के सकरात्मक एवं नकारत्मक प्रभाव:

३.१ नकारात्मक प्रभाव :  अगर कुंडली में अनंत कालसर्प योग दूषित या नकारात्मक है तो जातक मानसिक अशांति,अस्थिरता , प्रेत-बाधा से ग्रसित,मौकापरस्ती और षडयंत्रो में कारण और अकारण ही फंसने वाला होता है ! जातक पर झूठा आरोप लगने की प्रबल संभावना होती है ! जातक जीवन पर्यन्त उदर विकार से पीड़ित रहता है ! इन जातको पर नज़र एवं जादू-टोनो का असर जल्दी होता है ! और यह तब अधिक प्रभावी होता है जब लग्न एवं राशि एक ही होती है. ऐसे जातको को स्वपन में सर्प दिखना स्वाभाविक होता है .

३.२ सकारात्मक प्रभाव : यदि यह योग जब अपनी उच्च राशि अर्थात वृषभ एवं मिथुन राशि पर आता है तब जातक के लिए राजयोग कारक सिद्ध होता है ! इसके फलस्वरूप जातक को उच्चस्तरीय भवन का मालिक, उच्चस्तरीय की गाड़िया का लाभ एवं विदेश गमन भी करता है !

४ विभिन्न लग्नो के अंतर्गत बनने वाले अनंत काल सर्प योगो का फल : 

४.१ मेष लग्न का अनंत कालसर्प योग फल  : मेष राशि से बना हुआ अनंत कालसर्प योग जातको का कारण और अकारण के मुक्कदमो,कोर्ट -कचहरी का चक्कर लगवाता है ! भूमि-भवन सम्बंधित हानि होती है ! जीवन में आर्थिक सम्बन्धी हानि होती रहती है ! जीवन पर्यन्त उदर या पेट सम्बन्धी रोग होने की प्रबल सम्भावनां रहती है !

४.२ वृषभ लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : वृष में बने हुए अनंत कालसर्प योग से जातक का स्वास्थय प्रायः सामान्य होता है परन्तु श्वास तथा कफ की समस्या बनी रहती है ! जीवन संघर्षो में व्यतीत होता है किन्तु आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने पर भी मन में कहीं न कहीं असंतोष को स्थिति बनी रहती है.

४.३ मिथुन लग्न का अनंत कालसर्प योग  फल : मिथुन लग्न का अनंत कालसर्प योग जातक की बौद्धिक क्षमता को कम करता है ! मान सम्मान एवं पद प्रतिष्टा के लिए जीवन पर्यन्त संघर्ष करना पड़ता है ! किसी और की जरुरत पड़ने पर इस योग वाला व्यक्ति उनकी सहायता कर सकता है किन्तु स्वयं पर समस्या या कष्ट आने पर कोई भी सहायता नहीं करता है ! व्यापार एवं नौकरी में बाधक होता है ! धार्मिक आस्था में कमी रहती है ! पेट एवं पेट से निचले हिस्से की बीमारी से ग्रसित तथा चोट लगने की संभावना अधिक रहती है !

४.४ कर्क लग्न का अनंत कालसर्प योग फल: कर्क लग्न का अनंत कालसर्प योग जातक को हमेशा मानसिक चिंताओं से घेरे रखता है. किसी भी कार्य में सफलता न होने के कारण हमेशा इन पर मानसिक तनाव और निराशात्मक विचारों का दबाव बना रहता है. ऐसे जातक में विश्वास की कमी, उत्सासहीन एवं आलसी होते है ! इन जातको पर नज़र एवं जादू-टोनो का असर जल्दी होता है ! ऐसे जातको का नपुंसक होना स्वाभाविक होता है ! मंद बुद्धि के जातक इस कालसर्प योग से ग्रसित होने की प्रबल संभावना होती है !

४.५ सिंह लग्न का अनंत कालसर्प योग फल: सिंह लग्न का अनंत कालसर्प योग का जातक व्यक्ति निडर और स्वतंत्र विचारों वाला तो होता है, किन्तु कहीं न कहीं इनको अकारण ही भय तथा मन में सैदव बैचनी सी बनी रहती है !ऐसे जातक हमेशा जोखिम लेने के लिए तैयार रहता है और अपने इस दु:साहसी व्यवहार के कारण अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ जाता है .सरकारी मामलों में लापरवाही इनके लिए नुकसानदेय हो सकता है. किसी विवाद में इन्हें आदलत के भी चक्कर लगाने पड़ते हैं.इन जातको को अपच , मंदाग्नि , संग्रहणी और जिगर का कमजोर आदि जैसी बीमारी होती है !

४.६ कन्या लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : कन्या लग्न का अनंत कालसर्प योग अत्यधिक कष्ट देने वाला होता है,क्यूंकि इन जातको के लिए किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना बहुत ही कठिन होता है. इन जातको को अपने ही प्रायः धोखा देने वाले होते है ! अकारण ही षड़यंत्र का शिकार बन जाता है जिससे इनको अपयश का भागी बनना पड़ता है ! प्रायः इन जातको को पुत्र की प्राप्ति बड़ी कठिनाई से होती है ,अगर पुत्र की प्राप्ति हो भी जाये तो केवल दुःख का कारण बनती है ! प्रायःसंधि व्यापार में सफलता नहीं मिलती और भागिदार दोखा ही देता है ऐसा देखने को मिलता है ! बौद्धिक क्षमता प्रायः कमजोर ही रहती है !

४.७ तुला लग्न का अनंत कालसर्प योग फल :तुला लग्न का अनंत कालसर्प योग जातक को अकारण ही आर्थिक रूप से परेशान करता है !आय के साधन तो प्रायः अच्छे होते है परन्तु व्यय कहीं अधिक होने के कारण मन में हमेशा चिंता सी बनी रहती है और व्यय भी बेफिज़ूल के होते है ! धार्मिक कार्य या धर्म-कर्म के प्रति अरुचि होती है ! प्रायः इनके व्यवहार में उग्रता देखने को मिलती है !

४.८ वृश्चिक लग्न का अनंत कालसर्प योग फल :वृश्चिक लग्न का अनंत कालसर्प योग के जातक को भूमि से सम्बंधित समस्या बनी रहती है,जिसके कारण जातक को कोर्ट -कचहरी के चक्कर भी लगाने पड़ते है ! जातक को प्रत्येक क्षेत्र में काफी जद्दो जहद करनी पड़ती है चाहे व्यवसाय या नौकरी हो ,तो कहीं मान सम्मान की बात हो ! ऐसे जातक स्वयं कपटी ,झूठ बोलने वाला एवं कलहप्रिय होता है ! ऐसे जातको को पेट एवं रक्त से सम्बंधित बीमारी होने की प्रबल संभावना होती है !

४.९ धनु लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : धनु लग्न का अनंत कालसर्प योग प्रायः जातक के दांपत्य जीवन में बुरा प्रभाव डालता है ! प्रायः ऐसे जातको का विवाह काफी देर से होने की संभावना होती है ! वैवाहिक जीवन में अस्थिरता के कारण तलाक होने तक की संभावना रहती है ! इन जातको प्रायः किसी स्त्री की वजह से काफी हानि उठानी पड़ती है,जिसके कारण इनको समाज में अपयश की प्राप्ति होती है ! धार्मिक कार्य में अरुचि और बौद्धिक क्षमता काफी कम होती है !

४.१० मकर लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : मकर लग्न का अनंत कालसर्प योग प्रायः ऐसे जातको को दुर्बुद्धि,व्यसनी और लालची बनाते है ! बात-बात पर  कसम खाना तो इनके के लिए बहुत सरल कार्य होता है ! यह जातक कामी भी होते है जो इनके लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होता है ! धन का महत्व इनके जीवन में बहुत होता है और धन की लालसा इनको गलत कार्य करने से भी नहीं रोक पाती है ! यह जातक जीवन पर्यन्त शारीरिक समस्याओ या बीमारियों से घिरे रहते है,जिनका समुचित निदान नहीं हो पता है ! प्रायःअपनों से धोखा मिलने के कारण मन अशांत रहता है !

४.११ कुम्भ लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : कुम्भ लग्न का अनंत कालसर्प योग प्रायः जातको को भूत-प्रेत, जादू-टोना ,टोटके एवं ऊपरी सम्बंधित समस्याओं से घेरे रहते है ! इन जातको को नज़र लगना स्वाभाविक होता है ! इन जातको पर विश्वास करना कुछ कठिन हो पाता है क्यूंकि यह जातक झूठ बोलने में काफी चतुर होते है ! ऐसे जातक बात-बात पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते है ! इन जातको का घर से अलगाव रहता है ! आर्थिक स्थिति प्रायः अनिश्चित रहती है !  दाम्पत्य जीवन में भी यह योग बाधक बनता है,जातक के अपने जीवन साथी के साथ संबंधों में मधुरता नहीं होती !

४.१२ मीन लग्न का अनंत कालसर्प योग फल : मीन लग्न का अनंत कालसर्प योग जातक के दाम्पत्य जीवन में बाधक बनता है,बितते वक्त के साथ जातक और जातक के जीवन साथी के बीच तनाव की स्थति बढ़ती जाती है ! ये योग जातक के नाजायज़ सम्बन्ध होने का संकेत भी करती है ! ऐसे जातक धर्म-कर्म एवं ईश्वर में तनिक भी आस्था नहीं रखते है ! इच्छा के अनुरूप फल न मिलने पर मन में सैदव ग्लानि बनी रहती है ! प्रायः इन्हे सम्बन्धो को लेकर सैदव संदेह बना रहता है ! जातक के लिए पुत्र कष्टकारक सिद्ध होते है ! पढाई के क्षेत्र में कुछ अच्छा प्रदर्शन नहीं होता है !

 

 

 

हमारा निरंतर प्रयास यही रहता है कि हम लेख से सम्बंधित सटीक एवं विश्वसनीय जानकारी आप सभी तक पहुंचाते रहे,” यही हमारा उद्देश्य और यही हमारी कामना है !”

TO BE CONTINUED…………..

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